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अदम से लाई है हस्ती में आरज़ू-ए-रसूल / Adam Se Layi Hai Hasti Mein Aarzoo-e-Rasool

'अदम से लाई है हस्ती में आरज़ू-ए-रसूल कहाँ-कहाँ लिए फिरती है जुस्तजू-ए-रसूल ख़ुशा वो दिल कि हो जिस दिल में आरज़ू-ए-रसूल ख़ुशा वो आँख जो हो मह्व-ए-हुस्न-ए-रू-ए-रसूल तलाश-ए-नक़्श-ए-कफ़-ए-पा-ए-मुस्तफ़ा की क़सम चुने हैं आँखों से ज़र्रात-ए-ख़ाक-ए-कू-ए-रसूल फिर उन के नश्शा-ए-'इरफ़ाँ का पूछना क्या है जो पी चुके हैं अज़ल में मय-ए-सुबू-ए-रसूल बलाएँ लूँ तेरी, ऐ जज़्ब-ए-शौक़-ए-सल्ले-'अला कि आज दामन-ए-दिल खिच रहा है सू-ए-रसूल शगुफ़्ता गुलशन-ए-ज़हरा का हर गुल-ए-तर है किसी में रंग-ए-'अली और किसी में बू-ए-रसूल इलाही ! हश्र के दिन इस लिबास में उट्ठूँ मली हुई हो मेरे तन से ख़ाक-ए-कू-ए-रसूल 'अजब तमाशा हो मैदान-ए-हश्र में, बेदम ! कि सब हों पेश-ए-ख़ुदा और मैं रू-ब-रू-ए-रसूल शायर: बेदम शाह वारसी ना'त-ख़्वाँ: फ़रीद अयाज़ हाजी तस्लीम आरिफ़ असद इक़बाल कलकत्तवी 'adam se laai hai hasti me.n aarzoo-e-rasool kahaa.n-kahaa.n liye phirti hai justjoo-e-rasool KHusha wo dil ki ho jis dil me.n aarzoo-e-rasool KHusha wo aankh jo ho mahw-e-husn-e-roo-e-rasool tal...

नात कहता हूँ मैं नात पढ़ता हूँ मैं | प्यारे आक़ा की मिदहत बड़ी चीज़ है / Naat Kehta Hun Main Naat Padhta Hun Main | Pyare Aaqa Ki Midhat Badi Cheez Hai

ना'त कहता हूँ मैं, ना'त पढ़ता हूँ मैं प्यारे आक़ा की मिदहत बड़ी चीज़ है ये स'आदत भी है, ये 'इबादत भी है ना'त पढ़ने की 'आदत बड़ी चीज़ है शेर बकरी को ले कर गया शान से लोग समझे की बकरी गई जान से मुस्तफ़ा की बदौलत अमाँ मिल गई मुस्तफ़ा की ज़ियारत बड़ी चीज़ है जाँ की बाज़ी लगा कर भी नाकाम हो इक अदा छोड़ कर कैसे बे-दाम हो सिर्फ़ मिस्वाक से जंग को जीत ली मेरे आक़ा की सुन्नत बड़ी चीज़ है डूब कर भी वो फ़ौरन पलट आएगा और सहबा में आ कर ये बतलाएगा हुक्म-ए-महबूब-ए-रब मानना है मुझे मुस्तफ़ा की इता'अत बड़ी चीज़ है चार सौ साल से साँप बेताब था उस की आँखों में बस एक ही ख़्वाब था इक नज़र देख लूँ रू-ए-बदरुद्दुजा उस के दिल की ये हसरत बड़ी चीज़ है जिस को चाहा नबी ने वली कर दिया इक नज़र उठ गई और 'अली कर दिया पूछो सिद्दीक़-ओ-फ़ारूक़-ओ-'उस्मान से मुस्तफ़ा की ख़िलाफ़त बड़ी चीज़ है माँ के क़दमों को सर पे उठाए चलो उस की ता'ज़ीम दिल में बसाए चलो उस से कतरा के दोज़ख़ में जाओ न तुम माँ के क़दमों की जन्नत बड़ी चीज़ है मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत का फ़ैज़ान है अहल-ए-सुन्नत का महफूज़ ईमान है आ'ला हज़र...

जान-ए-आदम जान-ए-ईसा आप हैं / Jaan-e-Aadam Jaan-e-Isa Aap Hain

जान-ए-आदम जान-ए-'ईसा आप हैं रब ही जाने और क्या-क्या आप हैं सारा 'आलम आप की ख़ातिर दुल्हन और आक़ा इस के दूल्हा आप हैं माल-ओ-दौलत की मुझे ख़्वाहिश नहीं मेरी चाँदी, मेरा सोना आप हैं आ'ला हज़रत ने हमें बतला दिया सब से औला, सब से आ'ला आप हैं का'बा-ए-अतहर है क़िब्ला दहर का का'बा-ए-अतहर का क़िब्ला आप हैं नाज़ कीजे, ऐ असद इक़बाल जी ! बुलबुल-ए-बाग़-ए-मदीना आप हैं शायर: असद इक़बाल कलकत्तवी ना'त-ख़्वाँ: असद इक़बाल कलकत्तवी jaan-e-aadam jaan-e-'isa aap hai.n rab hi jaane aur kya-kya aap hai.n saara 'aalam aap ki KHaatir dulhan aur aaqa is ke dulha aap hai.n maal-o-daulat ki mujhe KHwaahish nahi.n meri chaandi, mera sona aap hai.n aa'la hazrat ne hame.n batla diya sab se aula, sab se aa'la aap hai.n kaa'ba-e-at.har hai qibla dahr ka kaa'ba-e-at.har ka qibla aap hai.n naaz keeje, ai Asad Iqbal Ji ! bulbul-e-baaG-e-madina aap hai.n Poet: Asad Iqbal Kalkattavi Naat-Khwaan: Asad Iqbal Kalkattavi हिन्दी ...

हम आशिक़-ए-सरकार पे जो रंग चढ़ा है | ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है / Hum Aashiq-e-Sarkar Pe Jo Rang Chadha Hai | Ye Rang-e-Raza Rang-e-Raza Rang-e-Raza Hai

हम 'आशिक़-ए-सरकार पे जो रंग चढ़ा है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है जिस रंग से हर रंग वहाबी का उड़ा है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है जो दिल में दिया 'इश्क़-ए-रिसालत का जला है और आँखों में जो ख़्वाब मदीने का सजा है जो विर्द-ए-ज़बाँ सल्ले-'अला सल्ले-'अला है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है सुन्नी का वहाबी से कोई मेल नहीं है मस्लक है रज़ा का ये कोई खेल नहीं है सुन्नी तो वहाबी से मिलेगा न मिला है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है गुस्ताख़-ए-नबी से न डरे हैं न डरेंगे तलवार के साए में भी हक़ बात कहेंगे ये मर्द-ए-मुजाहिद ने स'ऊदी से कहा है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है इक हुज्जतुल-इस्लाम हैं, इक मुफ़्ती-ए-आ'ज़म इन दोनों से टकराए किसी में भी नहीं दम सुल्तान-ए-ज़माना भी यहाँ आ के झुका है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है बद-मज़हबों को फूलने-फलने नहीं देंगे सरकार के दुश्मन को सँभलने नहीं देंगे ये दर्स हमें ताज-ए-शरी'अत ने दिया है ये रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा रंग-ए-रज़ा है वो माँ हो, बहन-भाई हो या कोई हो अपना सरकार के दुश्मन से त'अल्लुक़...

नबी के इश्क़ में ढल कर नबी की नात पढ़ते हैं / Nabi Ke Ishq Mein Dhal Kar Nabi Ki Naat Padhte Hain

नबी के 'इश्क़ में ढल कर नबी की ना'त पढ़ते हैं जो 'आशिक़ हैं वही अक्सर नबी की ना'त पढ़ते हैं नज़र अपनी जमा कर गुंबद-ए-ख़ज़रा की रंगत पर मदीन-ए-पाक के मंज़र नबी की ना'त पढ़ते हैं ज़रा अंदाज़ तो देखे कोई ज़हरा के बेटे का कटा के रन में अपना सर नबी की ना'त पढ़ते हैं है आग़ोश-ए-पिदर, मुस्कान लब पर, तीर ज़ालिम का अजब माहौल में असग़र नबी की ना'त पढ़ते हैं इमाम अहमद रज़ा का 'इश्क़ भी कितना निराला है उठा कर बहर से लंगर नबी की ना'त पढ़ते हैं ठिकाने उन के दुश्मन को लगाते हैं रज़ा वाले बदल के अपना जब तेवर नबी की ना'त पढ़ते हैं कमाल इस में असद का कुछ नहीं, है ना'त की बरकत जो बरसों से सर-ए-मिम्बर नबी की ना'त पढ़ते हैं शायर: असद इक़बाल कलकत्तवी ना'त-ख़्वाँ: असद इक़बाल कलकत्तवी nabi ke 'ishq me.n Dhal kar nabi ki naa't pa.Dhte hai.n jo 'aashiq hai.n wahi aksar nabi ki naa't pa.Dhte hai.n nazar apni jama kar gumbad-e-KHazra ki rangat par madin-e-paak ke manzar nabi ki naa't pa.Dhte hai.n zara andaaz to dekhe koi zahr...

सारे आलम में मोहब्बत की घटा छाई है / Sare Aalam Mein Mohabbat Ki Ghata Chhai Hai

सारे 'आलम में मोहब्बत की घटा छाई है आप आए तो ज़माने में बहार आई है रूह जब वादी-ए-पुरदर्द में घबराई है उम्मती-उम्मती आक़ा की सदा आई है बन के ख़ुश्बू जो मेरे दिल में उतर आई है वो तेरी याद है, अब रूह समझ पाई है आँख के तिल में है महफ़ूज़ जमाल-ए-ख़ज़रा जैसे जन्नत मेरी नज़रों में सिमट आई है ज़ात-ए-सरकार है नूरानी सहीफ़ों की दलील या'नी क़ुरआन से पहले ये किताब आई है हर जगह मेरे लिए सब ने बिछाईं आँखें हर जगह तेरी ही निस्बत मेरे काम आई है कोई मुश्किल हो, कोई ग़म हो, करो ज़िक्र-ए-हबीब ये दवा वो है जो हर दौर में काम आई है मरने वाले की खुली आँख खुली रहने दो वो नज़र जल्वा-ए-आक़ा की तमन्नाई है जब तबीयत ग़म-ए-तन्हाई से घबराई है हम तेरे साथ हैं, ये उन की सदा आई है सारी दुनिया की निगाहों से गिरा है बेदम तब कहीं जा के तेरे दिल में जगह पाई है शायर: बेदम शाह वारसी ना'त-ख़्वाँ: असद इक़बाल कलकत्तवी saare 'aalam me.n mohabbat ki ghaTa chhaai hai aap aae to zamaane me.n bahaar aai hai rooh jab waadi-e-purdard me.n ghabraai hai ummati-ummati aaqa ki sada aai hai ban ke...

दे कर ख़ुदा को जान की क़ीमत ख़रीद ली / De Kar Khuda Ko Jaan Ki Qeemat Khareed Li

दे कर ख़ुदा को जान की क़ीमत ख़रीद ली हर 'आशिक़-ए-रसूल ने जन्नत ख़रीद ली आक़ा ने अपनी ज़िंदगी ग़ुर्बत में काट कर दुनिया के हर ग़रीब की ग़ुर्बत ख़रीद ली असग़र के उस तबस्सुम-ए-मा'सूम पर निसार जिस ने यज़ीदियों की हुकूमत ख़रीद ली जिस ने नबी की याद को दिल में बसा लिया समझो कि उस ने ख़ुल्द की राहत ख़रीद ली सौ बार उस दीवाना-ए-सरकार को सलाम जिस से ज़ुबैदा बीबी ने जन्नत ख़रीद ली मशहूर कर दिया मुझे आक़ा की ना'त ने मैं ने नबी की ना'त से शोहरत ख़रीद ली मे'राज-ए-मुस्तफ़ाई पे क़ुर्बान जाइए जिस ने ज़मीं के वास्ते 'अज़मत ख़रीद ली अल्लाह ने मुस्तफ़ा की रज़ा के लिए, असद ! बाज़ार-ए-मुस्तफ़ाई से उम्मत ख़रीद ली शायर: असद इक़बाल कलकत्तवी ना'त-ख़्वाँ: असद इक़बाल कलकत्तवी de kar KHuda ko jaan ki qeemat KHareed li har 'aashiq-e-rasool ne jannat KHareed li aaqa ne apni zindagi Gurbat me.n kaaT kar duniya ke har Gareeb ki Gurbat KHareed li asGar ke us tabassum-e-maa'soom par nisaar jis ne yazeediyo.n ki hukoomat KHareed li jis ne nabi ki yaad ko dil me.n basa liya sa...

मरहबा वो नूर वाला आ गया | क्या सुहाना वक़्त है दुनिया में आना नूर का / Marhaba Wo Noor Wala Aa Gaya | Kya Suhana Waqt Hai Duniya Mein Aana Noor Ka

Marhaba Wo Noor Wala Aa Gaya Lyrics in Hindi & English मरहबा वो नूर वाला आ गया मरहबा वो नूर वाला आ गया क्या सुहाना वक़्त है दुनिया में आना नूर का हो मुबारक, 'आशिक़ो ! तशरीफ़ लाना नूर का दीदा-ए-बे-नूर ने देखा ज़माना नूर का गूँजता है सारे 'आलम में तराना नूर का मरहबा वो नूर वाला आ गया मरहबा वो नूर वाला आ गया क्या बयाँ हो शाह-ए-बतहा के हसीं एहसान का आदमी देखेगा चेहरा इक नए इंसान का ढल रहा है पुर्ज़ा पुर्ज़ा ज़ेवर-ए-ईमान का क्या मदीने में लगा है कारख़ाना नूर का मरहबा वो नूर वाला आ गया मरहबा वो नूर वाला आ गया नय्यर-ए-चर्ख़-ए-शहादत मुस्तफ़ा के नूर-ए-'ऐन दिलबर-ए-मौला 'अली हैं फ़ातिमा ज़हरा के चैन एक धागा हैं हसन तो दूसरे आक़ा हुसैन चादर-ए-ततहीर का हर ताना-बाना नूर का मरहबा वो नूर वाला आ गया मरहबा वो नूर वाला आ गया अहल-ए-सुन्नत का 'अक़ीदा ख़ूब ये रौशन हुआ मुस्तफ़ा के नूर ही से नूर का है सिलसिला आ'ला हज़रत का ये मिस्रा' क़ौल-ए-फ़ैसल बन गया तू है 'ऐन-ए-नूर तेरा सब घराना नूर का मरहबा वो नूर वाला आ गया मरहबा वो नूर वाला आ गया तितलियाँ हुस्न-ए-करम पे ख़ूब ...

फ़िदा कर इश्क़-ए-नबी पर जान | ज़माना याद करेगा / Fida Kar Ishq-e-Nabi Par Jaan | Zamana Yaad Karega

फ़िदा कर 'इश्क़-ए-नबी पर जान मुकम्मल कर ले तू ईमान ज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा दिन-रात तड़प ये रहती है, ऐ काश ! मदीना जाऊँ मैं अल्ताफ़-ओ-करम की वादी से ता-'उम्र न वापस आऊँ मैं मेरे दिल का है यही अरमान निछावर कर दूँ उन पर जान ज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा जब याद नबी की आती है, इक कैफ़ का 'आलम होता है जब ज़िक्र-ए-नबी छिड़ जाता है, इक वज्द का मौसम होता है यही तो कहता है क़ुरआन कि आक़ा हैं जान-ए-ईमान ज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा सरकार से तू है दूर मगर, सरकार तो तुझ से दूर नहीं क्यूँ खोया खोया रहता है, मुख़्तार है तू मजबूर नहीं नबी को पहले दिल से मान नबी पे सब कुछ कर क़ुर्बान ज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा अस्लाफ़ की है तारीख़ यही, साहिल पे जला दी है कश्ती दौड़ाए हैं घोड़े दरिया पर, क्या 'इश्क़-ए-नबी की मस्ती थी तुम्ही हो वो मर्द-ए-मैदान ज़रा ढूँडो अपनी पहचान ज़माना याद करेगा, ज़माना याद करेगा जो बात थी आ'ला हज़रत में, वो आज किसी हज़रत में नहीं वो 'इश्क़-ए-नबी का पैकर थे, थर्राते थे उन से दुश्मन भी दिया हम को कंज़ुल-ईमान ये है हम पर उन का एहसान ज़मा...

आला हज़रत का तराना जब सुनाएगा दीवाना | आला हज़रत का डंका बजेगा / Ala Hazrat Ka Tarana Jab Sunayega Deewana | Ala Hazrat Ka Danka Bajega

आ'ला हज़रत का तराना जब सुनाएगा दीवाना सुन के सुन्नी मचलता रहेगा आ'ला हज़रत का डंका बजेगा नाम-ए-अहमद रज़ा जिस को प्यारा नहीं ऐसा इंसान हम को गवारा नहीं आ'ला हज़रत का जिस लब पे ना'रा नहीं चाहे कुछ भी हो लेकिन हमारा नहीं चाहे हो कोई वहाबी चाहे हो कोई गुलाबी उस से रज़वी हमेशा लड़ेगा आ'ला हज़रत का डंका बजेगा 'इल्म-ओ-हिकमत का उस को ख़ज़ाना मिला जिस को अहमद रज़ा का ज़माना मिला देखो ऐसा नक़ी का घराना मिला ख़ुल्द का जिस जगह से ठिकाना मिला ये ज़माने को सुना दो सारी दुनिया को बता दो अपना मर्कज़ बरेली रहेगा आ'ला हज़रत का डंका बजेगा आ'ला हज़रत के जितने भी ग़द्दार हैं उन से तनहा ये लड़ने को तय्यार हैं फ़ौज़-ए-अख़्तर-रज़ा के ये सालार हैं मेरे 'अस्जद रज़ा रज़वी तलवार हैं किस की हिम्मत है टकराए कोई अहमक़ को समझाए हक़ के हाथों से बातिल मिटेगा आ'ला हज़रत का डंका बजेगा जब ग़ुलाम-ए-रज़ा की सवारी चले देवबंदी के सीने पे आरी चले जब वो बन के रज़ा की कटारी चले साँस भी देवबंदी की भारी चले आ'ला हज़रत का मस्ताना जो रज़ा का है दीवाना दुश्मनों से वो डट के कहेगा आ'ला...

नूर का ऐसा सरापा ढूँडते रह जाओगे / Noor Ka Aisa Sarapa Dhoondte Reh Jaoge

नूर का ऐसा सरापा ढूँडते रह जाओगे साया मेरे मुस्तफ़ा का ढूँडते रह जाओगे ना'त की 'आदत हमें जन्नत तलक ले जाएगी तुम क़िताबों में हवाला ढूँडते रह जाओगे शामियाना-ए-मुहम्मद हश्र में देगा पनाह मुन्किरो ! उस दिन भी साया ढूँडते रह जाओगे सर कटाएँ, घर लुटाएँ अहल-ए-बैत-ए-मुस्तफ़ा हश्र तक ऐसा घराना ढूँडते रह जाओगे जो भी गुस्ताख़ी करेगा 'आइशा की शान में इस तरह गाड़ेंगे ज़िंदा ढूँडते रह जाओगे हज़रत-ए-शब्बीर ने सज्दा जो कर्बल में किया है ये दा'वा ऐसा सज्दा ढूँडते रह जाओगे मत जलो ग़ौस-उल-वरा से वर्ना फिर रोज़-ए-जज़ा मुँह छुपाने का ठिकाना ढूँडते रह जाओगे लौटना तयबा से, कातिब ! 'आशिक़ों से पूछिए सब्ज़ गुंबद का नज़ारा ढूँडते रह जाओगे ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी मुहम्मद हस्सान रज़ा क़ादरी नूर का ऐसा सरापा ढूँडते रह जाओगे जिस का सानी और साया ढूँडते रह जाओगे मुस्तफ़ा के जिस इशारे से हुआ मैं मो'तबर चाँद बोला वो इशारा ढूँडते रह जाओगे आज लो उन का वसीला, आज लो उन से मदद वर्ना महशर में वसीला ढूँडते रह जाओगे मिस्ल उन का ढूँडते हो, नज्दियो ! रब की क़सम तुम तो ...

ये मेरे दिल से पूछिए कहाँ कहाँ हुसैन हैं / Ye Mere Dil Se Puchhiye Kahan Kahan Hussain Hain

ये मेरे दिल से पूछिए कहाँ कहाँ हुसैन हैं जहाँ जहाँ हैं मुस्तफ़ा, वहाँ वहाँ हुसैन हैं लहू जो उन का मिल गया, गुलाब जैसा खिल गया नबी का बाग़ बोल उठा कि बाग़बाँ हुसैन हैं न हर्फ़ कोई आएगा नबी के दीन-ए-पाक पर शरी'अत-ए-मुहम्मदी के पासबाँ हुसैन हैं ज़मीं पे रेंगती हुई यज़ीदियत को क्या ख़बर फ़लक फ़लक को है पता कि आसमाँ हुसैन हैं फ़ना फ़ना यज़ीदियत, बक़ा बक़ा हुसैनियत यज़ीद नार नार है, जिनाँ जिनाँ हुसैन हैं ना'त-ख़्वाँ: असद इक़बाल कलकत्तवी ye mere dil se poochhiye kahaa.n kahaa.n husain hai.n jahaa.n jahaa.n hai.n mustafa, wahaa.n wahaa.n husain hai.n lahu jo un ka mil gaya, gulaab jaisa khil gaya nabi ka baaG bol uTha ki baaGbaa.n husain hai.n na harf koi aaega nabi ke deen-e-paak par sharee'at-e-muhammadi ke paasbaa.n husain hai.n zamee.n pe rengti hui yazeediyat ko kya KHabar falak falak ko hai pata ki aasmaa.n husain hai.n fana fana yazeediyat, baqa baqa husainiyat yazeed naar naar hai, jinaa.n jinaa.n husain hai.n Naat-Khwaan: Asad Iqbal Kalkattavi Y...

जारी है हर लबों पे तराना हुसैन का / Jari Hai Har Labon Pe Tarana Hussain Ka

जारी है हर लबों पे तराना हुसैन का कल भी था, आज भी है ज़माना हुसैन का बेटों को मिस्ल-ए-ला'ल-ओ-जवाहिर लुटा दिया ख़ाली हुआ न फिर भी ख़ज़ाना हुसैन का ज़ैनब तेरी रिदा में है धागे ख़ुलूस के ताना हसन के प्यार का, बाना हुसैन का हर फूल में है बू-ए-नुबुव्वत बसी हुई गुलदस्ता-ए-नबी है घराना हुसैन का ना'त-ख़्वाँ: असद इक़बाल कलकत्तवी jaari hai har labo.n pe taraana husain ka kal bhi tha, aaj bhi hai zamaana husain ka beTo.n ko misl-e-laa'l-o-jawaahir luTa diya KHaali huaa na phir bhi KHazaana husain ka zainab teri rida me.n hai.n dhaage KHuloos ke taana hasan ke pyaar ka, baana husain ka har phool me.n hai boo-e-nubuwwat basi hui guldasta-e-nabi hai gharaana husain ka Naat-Khwaan: Asad Iqbal Kalkattavi Jari Hai Har Labon Pe Tarana Hussain Ka Lyrics | Jari Hai Har Labon Pe Tarana Hussain Ka Lyrics in Hindi | Kal Bhi Tha Aaj Bhi Hai Zamana Hussain Ka Lyrics | Muharram Naat Lyrics |hei labo par lyrics of naat | naat lyrics in hindi | islamic lyrics | hind...

या नबी बस इक इशारा कीजिए / Ya Nabi Bas Ek Ishara Kijiye

या नबी ! बस इक इशारा कीजिए सूरत-ए-मह चाक सीना कीजिए आमद-ए-सरकार की आई घड़ी ने'मत-ए-'उज़मा का चर्चा कीजिए आप पर जन्नत फ़िदा हो जाएगी बस मदीना ही मदीना कीजिए ज़िंदगी का लूटना है गर मज़ा उन पे मरने की तमन्ना कीजिए मेरे रब ने उन को मालिक कर दिया मुस्तफ़ा से आप माँगा कीजिए या रसूलल्लाह ! मदीने में रहूँ ख़्वाब देरीना है पूरा कीजिए सुन्नत-ए-असग़र समझ कर आप भी ज़ख़्म खा कर मुस्कुराया कीजिए कर के सिद्दीक़-ओ-'उमर का तज़्किरा राफ़िज़ियों का सफ़ाया कीजिए बात गर नज्दी से करनी ही पड़े अपने हर जुमले को जूता कीजिए पहले हो शैख़ैन का ज़िक्र-ए-जमील बा'द में ज़िक्र-ए-बलाग़ा कीजिए हम को ले जाएँगे जन्नत बिल-यकीं आ'ला हज़रत पे भरोसा कीजिए जानते हैं मुँह की खाएँगे मियाँ आ'ला हज़रत से न उलझा कीजिए पिलपिलापन छोड़िए अब, शैख़जी ! अज़हरी तेवर में बोला कीजिए सुल्ह-ए-कुल्ली या तो समझे या मरे कुछ मेरे, ताजुश्शरी'आ ! कीजिए ज़िंदगी क्यूँ दी गई मत भूलिए दर्स-ए-अख़्तर याद रक्खा कीजिए आप से कुछ भी नहीं हो पाएगा बे-वज्ह मत आप गर्जा कीजिए मसलक-ए-अहमद रज़ा ख़ाँ ज़िंदाबाद आम हर जानिब ये ना'...

हर नज़र काँप उट्ठेगी महशर के दिन | ख़ौफ़ से हर कलेजा दहल जाएगा / Har Nazar Kanp Uthegi Mehshar Ke Din | Khauf Se Har Kaleja Dahal Jayega

हर नज़र काँप उट्ठेगी महशर के दिन, ख़ौफ़ से हर कलेजा दहल जाएगा पर ये नाज़ उन के बंदे का देखेंगे सब, थाम कर उन का दामन मचल जाएगा मौज कतरा के हम से चली जाएगी, रुख़ मुख़ालिफ़ हवा का बदल जाएगा जब इशारा करेंगे वो नाम-ए-ख़ुदा, अपना बेड़ा भँवर से निकल जाएगा यूँ तो जीता हूँ हुक्म-ए-ख़ुदा से मगर, मेरे दिल की है उन को यक़ीनन ख़बर हासिल-ए-ज़िंदगी होगा वो दिन मेरा, उन के क़दमों पे जब दम निकल जाएगा रब्ब-ए-सल्लिम वो फ़रमाने वाले मिले, क्यूँ सताते हैं, ऐ दिल ! तुझे वसवसे पुल से गुज़रेंगे हम वज्द करते हुए, कौन कहता है पाँव फिसल जाएगा अख़्तर -ए-ख़स्ता ! क्यूँ इतना बेचैन है ? तेरा आक़ा शहंशाह-ए-कौनैन है लौ लगा तो सही शाह-ए-लौलाक से, ग़म मसर्रत के साँचे में ढल जाएगा शायर: मुफ़्ती अख़्तर रज़ा ख़ान ना'त-ख़्वाँ: सय्यिद अब्दुल वसी क़ादरी रज़वी ओवैस रज़ा क़ादरी असद इक़बाल कलकत्तवी har nazar kaanp uTThegi mehshar ke din KHauf se har kaleja dahal jaaega par ye naaz un ke bande ka dekhenge sab thaam kar un ka daaman machal jaaega mauj katra ke ham se chali jaaegi ruKH muKHaalif hawa ka badal jaaega...

आक़ा का बदन नूरानी बदन / Aaqa Ka Badan Noorani Badan

आक़ा का बदन नूरानी बदन नूरानी बदन, ला-सानी बदन ला-सानी बदन, नूरानी बदन नबी हैं नूरी दहन वाले नबी हैं नूरी सुख़न वाले नबी हैं नूरी ज़क़न वाले नबी हैं नूरी बदन वाले आक़ा का बदन नूरानी बदन नूरानी बदन, ला-सानी बदन ला-सानी बदन, नूरानी बदन अनमोल नगीना कहते हैं रहमत का दफ़ीना कहते हैं 'आलम का ख़ज़ीना कहते हैं जिसे लोग मदीना कहते हैं वो शहर-ए-नबी है शहर-ए-नबी रहमत का जहाँ बरसे सावन आक़ा का बदन नूरानी बदन नूरानी बदन, ला-सानी बदन ला-सानी बदन, नूरानी बदन दिल का गुलदान महकता है हर वक़्त, हर आन महकता है तू माने न माने, महकता है जिस से ईमान महकता है ऐसा है पसीना आक़ा का पाए तो महक जाती है दुल्हन आक़ा का बदन नूरानी बदन नूरानी बदन, ला-सानी बदन ला-सानी बदन, नूरानी बदन हर सुन्नी की हैं शान रज़ा हर 'आशिक़ की हैं जान रज़ा हैं ईमानी चट्टान रज़ा मारहरा की पहचान रज़ा उस प्यारे नबी के 'आशिक़ पे क़ुर्बान है अपना तन-मन-धन आक़ा का बदन नूरानी बदन नूरानी बदन, ला-सानी बदन ला-सानी बदन, नूरानी बदन ना'त-ख़्वाँ: असद इक़बाल कलकत्तवी aaqa ka badan nooraani badan nooraani ...